Indian Fisherman story in hindi- Sachi Kahani

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Indian Fisherman story in hindi- Sachi Kahani  दोस्तो आज हम इस पोस्ट में एक मझुवारे कि जिंदगी का कहानी जानेंगे और यह बिल्कुल सच्ची कहानी

मछली मारने से लेकर बुढ़ापे तक कि कहानी और ये बहुत रोमांचक होगा आप एक बार जरूर पढ़ें बेस्ट फिश खाने के लिए 

ndian fisherman story in hindi- Sachi Kahani

ये कहानी बिहार की हैं। एक गाँव मे मझुवारा का गाँव हैं वहां अधिक मझुवारे रहते हैं। नरेगा जॉब कार्ड

और नदी के किनारा हैं। अधिक मझुवारा नदी के किनारे ही रहते क्योकि उनको नदी मछली पकड़ने के लिए जाना होता हैं।

 Indian Fisherman story in hindi- Sachi Kaha

उसका नाम था राजा और वह बहुत दिनों से मछली मारने का काम करता था। वह मन ही मन दूसरा काम करने के लिए सोचता रहता था ।

एक दिन उसने गाँव ही में किराना का दुकान खोल दिया और दुकान अच्छी चलाने लगी

और उसका सारा काम अच्छे से होने लगा कुछ दिनों में ही कुछ पैसा हो गया ।

उसका एक लड़का जिसका नाम मोहन था वह पढ़ने में बहुत तेज और गााँव के सभी

लोग अच्छा कहते थे क्योंकि पढ़ने से लेकर बात करने की शैली अगर कोई काम कहता तो वह काम करता था।

मोहन को सभी लोग प्रनसंसा करते थे उसकी पढ़ाई जारी रही वह कभी स्कूल में फस्ट आता था

दस क्लास तक गाँव के हाई स्कूल में पढ़ने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए शहर चला गया और आगे की पढ़ाई की

पढ़ने के बाद Indian fisherman story in hindi- Sachi Kahani

पढ़ने के बाद उसने नौकरी की तलास करने लगा और एक दिन उसकी नौकरी लग गई ।

और वह नौकरी पर चल गया दो साल नौकरी के बाद उसके माता पिता ने शादी करने की सोची

और अच्छी सी लड़की देखकर शादी करा दी सभी परिवार सुखी से रहने लगे

शादी के बाद Indian fisherman story in hindi- Sachi Kahani

शादी को एक साल बीत गए मोहन के पत्नी ने एक बचे का जन्म दिया लेकिन उस समय मोहन डिप्टी पर था ।

डिप्टी से घर आया और अपने पत्नी से मिला तो उसका मन ही बदल गया

वह अपनी माता पिता को बोलने लगा वो कहने लगा मेरे पत्नी को मारने पर आपलोग तुले हो

उसकी कोई देख भाल नही हुई जबकि उसके पेट मे बचा था मोहन ने माता पिता दोनो को गालियां भी दी और भरा भुला कहा

और वह अपनी पत्नी को अपने साथ लेकर चला गया आज भी वही रहता हैं।

और अब गाँव के लोग जितना प्रसंसा करते थे उतना अब हिनाई भी करते हैं।

क्या मोहन ने सही किया जिसने बचपन से पाला पोषा बड़ा किया पढ़ाया लिखाया वह सभ बेकार हो गया एक पत्नी के कहने पर

क्या ऐसा करना चाहिए । क्योंकि वो भी एक दिन पिता बनेगा

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